General Rules and Regulations

संख्‍या बीमा-1316/दस-16-80

प्रेषक,

श्री जे॰ एल॰ बजाज,

वित्‍त सचिव,

उत्‍तर प्रदेश शासन।

सेवा में,

उत्‍तर प्रदेश के समस्‍त विभागाध्‍यक्ष तथा

अन्‍य समस्‍त प्रमुख कार्यालयाध्‍यक्ष।

वित्‍त (बीमा) अनुभाग।                           दिनांक, लखनऊ, 21 अक्‍­बर, 1981

विषय : राज्‍य कर्मचारियों के लिये सामूहिक बीमा एवं बचत योजना।

महोदय,

1- सं॰ बीमा-1/दस-2-80 दिनांक 19-2-80

2- सं॰ बीमा-13/दस-2-80 दिनांक 17-3-80

3- सं॰ बीमा-235/दस-2-80 दिनांक 12-5-80

4- सं॰ बीमा-75/दस-2(2)-80 दिनांक 30-1-1981

5- सं॰ बीमा-911/दस-81 दिनांक 18-8-81

मुझे सरकारी सेवकों पर दिनांक 1 मार्च, 1980 से लागू की गई सामूहिक बीमा एवं बचत योजना के संबंध में वित्‍त (बीमा) अनुभाग द्वारा पार्श्‍चांकित शासनादेशों की ओर आपका ध्‍यान आकर्षित करते हुए यह कहने का निदेश हुआ है कि उक्‍त योजना के संबंध में जो आदेश समय-समय पर शासन द्वारा प्रसारित किये गये हैं उन्‍हें विभिन्‍न कार्यालयों में समुचित रूप से सम्‍बद्ध नहीं किया जा सका है जिसके फलस्‍वरूप यह देखने में आया है कि शासन स्‍तर पर जो दावे प्राप्‍त होते हैं उनमें अनेक कमियां तथा त्रुटियां पाई जाती हैं। इन त्रुटियों का निवारण कराने के लिये दावों को वापस करना होता है जिससे इनके निस्‍तारण में विलम्‍ब होता है। अतएव यह निर्णय लिया गया है कि पार्श्‍वांकित समस्‍त आदेशों का एक संहत आदेश जारी किया जाय जिससे इस योजना का कार्यान्‍वयन सही-सही रूप से सुनिश्‍चित हो सके।

2- सामूहिक बीमा एवं बचत योजना के अन्‍तर्गत प्रत्‍येक सरकारी सेवक के वेतन से प्रत्‍येक मास कटौती की जायेगी जो प्रदेश के आय-व्‍ययक के लेखा शीर्षक 088 सामाजिक सुरक्षा एवं कल्‍याण-अन्‍य प्राप्‍तियां-कर्मचारी सामूहिक बीमा योजना का कार्यान्‍वयन राज्‍य कर्मचारियों का अभिदान-(क) पुलिस विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों को छोड़कर शेष अन्‍य समस्‍त अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा (ख) पुलिस विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा’’ के अन्‍तर्गत यथास्‍थिति, क्रेडिट की जायेगी। उपरोक्‍त लेखा शीर्षक के अन्‍तर्गत यह क्रेडिट दिनांक 1-4-1981 से किया जायेगा।

3- प्रत्‍येक सरकारी सेवक से जो कटौती उसके वेतन से होगी वह निम्‍न प्रकार की जायेगी :-

 

(1) पुलिस राजपत्रित अधिकारी

रु॰ 40 प्रतिमास

 

(2) पुलिस अराजपत्रित अधिकारी

रु॰ 15 प्रतिमास

 

(3) अन्‍य समस्‍त अधिकारी/कर्मचारी

रु॰ 20 प्रतिमास

समूह ‘घ’ वर्ग के ऐसे कर्मचारियों से जो अभी तक रु॰ 165-215/रु॰ 170-225 के वेतनमानों में वेतन प्राप्‍त कर रहे हैं, उनके माह सितम्‍बर, 1981 तक के वेतन से रु॰ 10 प्रतिमास की कटौती की जायेगी और दिनांक 30-9-81 तक उत्‍पन्‍न दावों का निस्‍तरण भी उसी आधार पर किया जायेगा, अर्थात् सेवारत मृत्‍यु होने पर बीमा धनराशि रु॰ 12,000 होगी और दिनांक 1-10-1981 तथा इसके उपरान्‍त उत्‍पन्‍न होने वाले दावों में बीमा धन रु॰ 25,000 होगा तथा माह अक्‍­बर 81 के वेतन से मासिक कटौती भी रु॰ 20 की दर से की जायेगी।

4- किसी भी अधिकारी एवं कर्मचारी की सेवारत मृत्‍यु होने पर उसके परिवार को बीमा धनराशि के अतिरिक्‍त उसके बचत खाते में जमा धनराशि 6 प्रतिशत चक्रवृद्धि ब्‍याज सहित वापस लौटाई जायेगी। सेवानिवृत्‍त होने पर तथा सेवा से अन्‍यथा पृथक होने पर, केवल त्‍याग-पत्र देकर सेवा से पृथक होने वाले मामलों को छोड़कर, सरकारी सेवक को बचत खाते में जमा धनराशि 6 प्रतिशत चक्रवृद्धि ब्‍याज सहित वापस की जायेगी जो कम से कम उतनी धनराशि अवश्‍य होगी जो उससे उसकी सेवा अवध में उसके वेतन से काटी गई हो। त्‍याग-पत्र देकर सेवा से पृथक होने की दशा में संबंधित सरकारी सेवक को केवल बचत खाते में जमा धनराशि 6 प्रतिशत चक्रवृद्धि ब्‍याज सहित वापस की जायेगी। बचत खाते में जमा धनराशि पर ब्‍यज की संगणना पूरे मास के आधार पर की जायेगी क्‍योंकि सरकारी सेवक द्वारा उसकी सेवा के अंतिम माह या उसके किसी भाग के लये पूरा अभिदान जमा कराया जाता है और बचत खाते में पूरी धनराशि की वापसी भी की जाती है।

5- दिनांक 1 मार्च, 1980 से लागू सामूहिक बीमा योजना शासन के नियमित अधिष्‍ठान में नियुक्‍त राज्‍य सरकार के अधीन समस्‍त पूर्णकालिक स्‍थायी एवं अस्‍थाई सेवकों पर लागू होगी। यह योजना उत्‍तर प्रदेश शासन के अधीन नियुक्‍त अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों पर भी लागू होगी। उत्‍तर प्रदेश शासन के अधिकारी/कर्मचारी जो शासन के किसी भी पद पर नियुक्‍त हों अथवा वाहृय सेवा पर हों अथवा भारत सरकार/किसी अन्‍य राज्‍य सरकार के अधीन प्रतिनियुक्‍ति पर हों इस योजना से आच्‍छादित रहेंगे। समस्‍त अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा इस योजना के निमित्‍त अपना मासिक अभिदान शासन को देना होगा चाहे वह ¤यूटी पर हों, चाहे अवकाश पर हों अथवा निलम्‍बित हों। अवकाश की अवधि तथा निलम्‍बन अवधि में चूंकि उनका रिसक कवर्ड (Covered) रहेगा, इसलिये उक्‍त अवधियों में भी अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा अपना अभिदान दिया जाना आवश्‍यक है। ऐसे अधिकारी एवं कर्मचारी जो दिनांक 1 मार्च, 1980 को प्रतिनियुक्‍ति पर हो, उनके बारे में संबंधित वाहृय सेवायोजक अथवा उस शासन द्वारा जिसके अधीन यह कार्य कर रहे हों ऊपर पैरा 2 में निर्धारित दर से कटौती माह मार्च, 1980 के वेतन से आरम्‍भ करके उत्‍तर प्रदेश शासन को ट्रेजरी चालान अथवा बैंक ड्राफ्ट द्वारा भेजेंगे और इस प्रकार से जमा की गई धनराशि का पूर्ण विवरण जैसे कर्मचारी का नाम, शासन के अधीन ग्रहण किया गया पद तथा विभाग का नाम, ट्रेजरी चालान/बैंक ड्राफ्ट संख्‍या तथा दिनांक तथा बैंक का नाम/ट्रेजरी का नाम देते हुए यह सूचना संबंधित बाहृय सेवायोजक/संबंधित शासन द्वारा उस अधिकारी/कर्मचारी के प्रशासनिक विभाग को दी जायेगी। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के संबंध में यह सूचना उत्‍तर प्रदेश शासन के नियुक्‍ति अनुभाग-1, भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों के लिए गृह (पुलिस सेवाएं) अनुभाग को तथा भारतीय वन सेवा के अधिकारियों के सम्‍बन्‍ध में यह सूचना वन विभाग को भेजनी होगी।

6- शासन द्वारा लागू की गई उपरोक्‍त योजना ऐसे कर्मचारियों पर लागू नहीं है जो अल्‍पकालीन रिक्‍तियो में अथवा सीजनल कार्य के लिए नियुक्‍त किये गये हों। यह योजना शासन को कोषागारों में नियुक्‍त कैश स्‍टाफ पर भी लागू नहीं होती है। उक्‍त योजना उच्‍च न्‍यायालय के मुख्‍य न्‍यायाधीश/न्‍यायाधीशों पर भी स्‍वत: लागू नहीं होगी, परन्‍तु यदि वह स योजना का लाभ उठाना चाहें तो उन्‍हें इसके लिये अपना विकल्‍प देना होगा और उस विकल्‍प के अनुसार वह अपना अभिदान शासन को देकर इस योजना का लभ उठा सकत हैं। इसी प्रकार उत्‍तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्‍यक्ष तथा सदस्‍यों के लिये भ्‍ज्ञी यह योजना ऐच्‍छिक रहेगी, अर्थात यदि वह चाहें तो विकल्‍प शासन को देकर अपना अभ्‍ज्ञदान दे सकते हैं और इसका लाभ प्राप्‍त कर सकते हैं शासन द्वारा लागू की जाने वाली यह योजना संबंधित सरकारी सेवकों पर उनकी सेवानिवृत्‍ति की तिथि तक ही प्रभावी रहेगी, अर्थात यदि सेवानिवृत्‍ति के दिनांक तक ही लागू रहेगी। प्राय: सेवानिवृत्‍ति के उपरांत सरकारी सेवक सेवा में पुर्योजित भी कर लिये जाते हैं अथवा उन्‍हें सेवा में प्रसार दे दिया जाता है। ऐसे मामलों में यह योजना उनकी सेवा में प्रसार की अवधि में लागू नहीं होगी और सेवानिवृत्‍ति के दिनांक के उपरान्‍त की गई सेवा के लिये न तो उनके वेतन से कोई कटौती की जायेगी और न ही उस पर शासन का कोई अंशदान देय होगा। अत: समस्‍त आहरण एवं वितरण अधिकारियों को इस बात पर विशेष ध्‍यान देना होगा कि इस येजना के अन्‍तर्गत अल्‍पकालीन रिकित्‍यों में नियुक्‍त कर्मचारियों, सीजनल कर्मचारियों कोषागारों के कैश स्‍टाफ तथा सेवानिवृत्‍ति के उपरान्‍त सेवा में बनाये रखे गये अधिकारियों/कर्मचारियों से कटौती नहीं की जानी है।

7- अधिकारियों एवं कर्मचारियों से की गई मासिक कटौती अधिष्‍ठान बिलों के माध्‍यम से की जायेगी और इसके लिये प्रत्‍येक आहरण एवं वितरण अधिकारी प्रत्‍येक वेतन बिल में इस आशय को प्रमाण-पत्र देगा कि वेतन बिल में दिखाये गये अल्‍पकालीन रिक्‍तियों में नियुक्‍ति कर्मचारियों को छोड़कर शेष समस्‍त अधिकारियों/कर्मचारियों के वेतन से निर्धारित कटौतियां कर ली गई है और कटौती की कुल धनराशि वेतन बिल के प्रथम पृष्‍ठ पर सामूहिक बीमा योजना की कटौती के रूप में दिखा दी गई है। राजपत्रित अधिकारियों के वेतन बिलों में भी जो अपना बिल स्‍वयं आहरित करते हैं, यह कटौती बिल के प्रथम पृष्‍ठ पर प्रस्‍तुत की जायेगी। जिन विभागों, में जैसे सचिवालय के इरला येाजना से आच्‍छादित अधिकारी, सार्वजनिक निर्माण विीााग, सिंचाई विभाग, वन विभाग, अधिकारियों को अधिष्‍ठान बिलों से कटौती कर लेने का प्रमाण-प.त्र उपरोक्‍तानुसार देना होगा। उपरोक्‍तानुसार सामूहिक बीमा योजना से संबंधित कटौती की धनराशि कोषागारों के लेखों में संक्रामक प्रविष्‍टि द्वारा नहीं ली जायेगी अपितु इसे सीधे ही महालेखाकार कार्यलय में भुगतान किये हुए बाउचरों से लेखा शीर्षक 088-सामाजिक सुरक्षा एवं कल्‍याण अन्‍य प्राप्‍तियां कर्मचारी सामूहिक बीमा योजना का कार्यान्‍वयन राज्‍य कर्मचारियों का अभिदान’ के अन्‍तर्गत प्राप्‍तियों के रूप में ल लिया जायेगा। वेतन बिल भुगतान हेतु पारित करने से पूर्व कोषाधिकारी यह देख लेंगे कि वेतन बिलों पर आहरण एवं वितरण अधिकारी ने उपरोक्‍त प्रमाण-पत्र दे दिया है और राजपत्रित वेतन बिलों में सामूहिक बीमा योजना से संबंधित कटौती कर ली गई है।

8-किसी भी अधिकारी/कर्मचारी के एक स्‍थान से दूसरे स्‍थान पर स्‍थानान्‍तरित होने पर उसे अंतिम वेतन प्रमाण-पत्र दिया जाना अनिवार्य होता है। अंतिम वेतन प्रमाण-पत्र में उस सभी कटौतियों आदि का उल्‍लेख किया जाता है जो संबंधित अधिकारी/कर्मचारी के वेतन से प्रतिमास काटी जाती है। चूंकि सामूहिक बीमा योजना के संबंध में वेतन से मासिक कटौती नियमित रूप से की जाती है, इसलिये यह आवश्‍यक है कि अंतिम वेतन प्रमाण-पत्र में इस कटौती का भी उल्‍लेख किया जाना चाहिए। अतएव संबंधित कोषाधिकारी द्वारा, जैसी भी स्‍थिति हो, यह उल्‍लेख किया जायेगा कि संबंधित अधिकारी/कर्मचारी ने अमुक दिनांक से अपना मासिक अभिदान निर्धारित दर से दिया है। इसी प्रकार सेवानिवृत्‍त होने अथवा सेवा से अन्‍यथा पृथक होने पर संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी द्वारा/संबंधित कोषाधिकारी द्वारा/पेंशन स्‍वीकृत करने वाले सक्षम अधिकारी द्वारा तथा अन्‍य किसी दशा में सक्षम अधिकारी द्वारा शासन को यह सूचना देनी होगी कि संबंधित अधिकारी/कर्मचारी ने सामूहिक बीमा योजना के अन्‍तर्गत दिनांक 1 मार्च, 1976 से अथवा इसके बाद नियुक्‍त होने की दशा में नियुक्‍ति के दिनांक से (नियुक्‍ति की तिथि का उल्‍लेख करते हुए) अपना अभिदान संबंधित अवधि में निर्धारित दर पर निरन्‍तर रूप से दिया है। इस सूचना के आधार पर शासन द्वारा उस अधिकारी/कर्मचारी को दिये जाने वाल धन का आगणन किया जायेगा और उसका भुगतान बचत खाते से 6 प्रतिशत चक्रवृद्धि ब्‍याज लगाकर किया जायेगा।

9 (क) सेवारत मृत्‍यु होन की दशा में मृतक अधिकारी/कर्मचारी के परिवार को बीमा धन तथा मृतक कर्मचारी द्वारा दिये गये अभिदान की बचत खाते में जमा धनराशि वापस किये जाने तथा सेवानिवृत्‍ति होने अथवा सेवा से अन्‍यथा पृथक होने पर बचत खाते में जमा धनराशि की वापसी के लिये एक ऋप्रक्रिया निर्धारित की गई है। जिसके अनुसार शासन के दावे का भुगतान प्राप्‍त करने वाले व्‍यक्‍ति द्वारा प्रपत्र संख्‍या-1 में अपने कार्यालयह विभागाध्‍यक्ष को 3 प्रतियों में आवेदन प्रस्‍तुत करना होगा। इस आवेदन पर कर्मचारी/लाभग्राही द्वारा 20 पैसे का रसीदी टिकट भी पहले से लगाना होगा। प्रपत्र संख्‍या-1 संबंधित पदाधिकारी द्वारा सत्‍यापित एवं प्रमाणित किया जायेगा और प्रविष्‍टियों को अगले अभिलेखों से पुष्‍टि करने के उपरान्‍त अपने विभागाध्‍यक्ष/कार्यालयाध्‍यक्ष, यथास्‍थिति को प्रस्‍तुत किया जायेगा।

(ख) कार्यालयाध्‍यक्ष/आहरण एवं वितरण अधिकारी प्रपत्र संख्‍या 1 के आधार पर समस्‍त दावों को संहत रूप से प्रपत्र सं॰-2 के पृ01 में भरकर राज्‍य कर्मचारी सामूहिक बीमा निदेशालय, लखनऊ को 3 प्रतियों में भेजेंगे। प्रत्‍येक दावे के प्रपत्र संख्‍या-1 की भी एक मूल प्रति रसीदी टिकट तथा अग्रसारण अधिकारी के मोहर सहित हस्‍ताक्षर के साथ निदेशालय को भेजनी होगी।

(ग) प्रपत्र संख्‍या 2 से पृ0 1 के विभिन्‍न स्‍तम्‍भों में विवरण का उल्‍लेख साफ-साफ तथा सेवा अभिलेखों से सत्‍यापित किये जाने के उपरांत भरा जायेगा। विभागाध्‍यक्ष/आहरण एवं वितरण अधिकारी, यथास्‍थिति प्रपत्र-2 के प्रथम पृष्‍ठ पर दिये गये प्रमाण-पत्र पर दिनांक सहित हस्‍ताक्षर करके तथा अपनी मोहर लगाकर उक्‍त निदेशालय को अगि्रम कार्यवाही हेतु भेजेंगे। प्रपत्र-2 के पृ0 2 के स्‍तम्‍भों में कोई भी प्रविष्‍टि विभागाध्‍यक्ष/कार्यालयाध्‍यक्ष आदि स्‍तर पर नहीं की जायेगी परन्‍तु विभागाध्‍यक्ष/आहरण एवं वितरण अधिकारी प्रपत्र-2 के पृ02 पर भी अपने हस्‍ताक्षर एवं अपनी मोहर लगाकर दावा निदेशालय को भेजेंगे।

(घ) सामूहिक बीमा योजना निदेशालय प्रपत्र -1 तथा प्रपत्र-2 की प्रतियां प्राप्‍त होने पर आवश्‍यक जांच पड़ताल दावेदारी/लाभार्थियों को दी जाने वाली धनराशि प्रपत्र संख्‍या 2 के पृ02 पर दिये गये स्‍तम्‍भों में अंकित करेंगे तथा अन्‍य स्‍तम्‍भ भी भरे जायेंगे। प्रत्‍येक दावेदार/लाभार्थी को दी जाने वाली धनराशि के लिये जारी किये गये चेक/चेकों की संख्‍या, दिनांक तथा धनराशि अंकित की जायेगी। धनराशियों के भुगतान का चेक मृतक अथवा सेवानिवृत्‍त/सेवा से अन्‍यथा पृथक व्‍यक्‍ति के संबंध में उसके विभागाध्‍यक्ष के नापम से जारी किया जायेगा। चेक के साथ सामूहिक बीमा येाजना निदेशालय विभागाध्‍यक्ष को मृतक/सेवानिवृत्‍त आदि कर्मचारी के संबंध में प्रपत्र संख्‍या 2 की दो प्रतियां आवश्‍यक विवरणों सहित अपने हस्‍ताक्षर तथा मोहर सहित वापस लौटायेंगे। दावों के प्रस्‍तुत करने से पूर्व केवल न्‍यूनतम तथा अत्‍यन्‍त आवश्‍यक तथ्‍यों की जांच-पड़ताल ही पर्याप्‍त होगी। परन्‍तु शासन से प्राप्‍त धनराशि का भुगतान करते समय समस्‍त सम्‍भावित तथ्‍यों की पुष्‍टि की जानी आवश्‍यक होगी जिसमें धनराशि का भुगतान सही व्‍यक्‍ति को ही किया जा सके।

(च) समस्‍त विभागाध्‍यक्षों द्वारा भारतीय स्‍टेट बैंक में अपने नाम से एक खाता इस आशय का खोलने जाने के आदेश वित्‍त (सामान्‍य) अनुभाग-3 के शासनादेश संख्‍या सा-3’-2005/दस-79-14-77, दिनांक 17 सितम्‍बर, 1979 में जारी किये जा चुके हैं। धनराशियों के चेक उपरोक्‍त खातें में ही जमा किये जायेंगे और संबंधित विभागाध्‍यक्ष अपने तथा अपने अधीनस्‍थ कार्यालयों के मृतक कर्मचारियों के लाभार्थियों/सेवानिवृत्‍त अथवा सेवा से अन्‍यथा पृथक कर्मचारियों के नाम से चेक जारी करेंगे जो ‘‘एकाउन्‍ट पेयी’’ होंगे। कार्यालयाध्‍यक्ष संबंधित व्‍यक्‍तियों के बारे में इस बात की पूरी जांच करके कि भुगतान सही व्‍यक्‍ति को ही किय जा रहा है, चेक जारी करेंगे। यह उनकी व्‍यक्‍तिगत जिम्‍मेदारी होगी कि संबंधित व्‍यक्‍ति द्वारा चेक प्राप्‍त होने पर निर्धारित प्रारूप में रसीद प्राप्‍त की जायेगी जिसे संबंधित कार्यालय बीमा योजना निदेशालय को रिकार्ड हेतु भेजेंगे। प्रस्‍तावित रसीद का प्रपत्र फार्म संख्‍या-4 में उपलब्‍ध है।

10-सामूहिक बीमा योजना के लिये वित्‍त विभाग द्वारा शासनादेश संख्‍या सा-3-2105/दस-14-77-नामांकन, दिनांक दिसम्‍बर, 1978 द्वारा आदेश प्रसारित किये जा चुके हैं। उपरोक्‍त आदेश यथावत् लागू रहेंगे। अत: यदि भुगतान के समय पुराने मामलों में इस बात का कोई विवाद उठता है कि अमुक मृतक कर्मचारी के संबंध में धनराशि प्राप्‍त करने का पात्र है या नहीं तो इस प्रश्‍न का निस्‍तारण विभागाध्‍यक्ष द्वारा शासनादेश के प्राविधानों के अनुसार स्‍वयं कर दिया जाना चाहिये और उसमें कोई विलम्‍ब नहीं होना चाहिये।

11- समस्‍त विभागाध्‍यक्षों से यह अनुरोध है कि वे अपने मुख्‍यालय पर अपने किसी अधीनस्‍थ अधिकारी को बीमा योजना संबंधी समस्‍त कार्यो की देखभाल तथा उनके निस्‍तारण हेतु नामांकित कर दें जो विभागाध्‍यक्ष की ओर से बैंक में खाते खोले गये लेखों को भी सम्‍पादित करेगा।

12- इस योजना से संबंधित लेखा-प्रणाली की प्रक्रिया से भी आपको अवगत कराया जाना है। इस योजना के अन्‍तर्गत कटौतियों तथा भुगतानों का लेखा जोखा राज्‍य सरकार द्वारा रखा जायेगा। इस योजना की प्राप्‍तियां सरकारी सेवकों द्वारा दिये गये मासिक अभिदान तथा उस पर शासन द्वारा दिये गये अपने अंशदान पर आधारित होती है। इन प्राप्‍तियों की धनराशि में से एक अंश रिस्‍क फंड में जमा किया जाता है तथा शेष भाग बचत खाते में जमा होता है। सेवारत मृत्‍यु की दशा में बीमाधन का भुगतान रिस्‍क फंड में जमा धनराशि से होता है। इस प्रकार शासन द्वारा निर्धारित दरों के अनुसार सरकारी सेवकों से लिये जाने वाल अभिदान तथा उस पर शासकीय अंशदान की दरें रिस्‍क-फंड में जमा होने वाली धनराशि और बचत खाते में जमा होने वाली धनराशि की स्‍थिति निम्‍न प्रकार होती है :-

अधिकारियों/कर्मचारियों की श्रेणी

अभिदान की मासिक दर

शासकीय अंशदान की मासिक दर

रिस्‍क फंड में जमा वार्षिक धनराशि

बचत खाते में जमा वार्षिक धनराशि

 

रु॰

रु॰

रु॰

रु॰

1- राजपत्रित पुलिस अधिकारी

40

3.40

186.00

334.80

2-अराजपत्रित पुलिस कर्मचारी

15

3.08

93.00

123.96

3- अन्‍य समस्‍त सरकारी सेवक

20

1.70

93.00

167.40

नोट : दिनांक 1-10-81 से पूर्व की अवधि के लिये रु॰ 165-215/170-225 के वेतनमानों में वेतन प्राप्‍त करने वाले कर्मचारियोंं के लिये मासिक अभिदान की दर रु॰ 10, शासकीय अंशदान की दर रु॰ 0.85 रिस्‍क फण्‍ड में जमा होने वाली वार्षिक धनराशि रु॰ 44.64 तथा बचत खात में जमा वार्षिक धनराशि रु॰ 85.60 होगी।

यहां यह भी उल्‍लेखनीय है कि शासन द्वारा जो धनराशि अंशदान के रूप में दी जाती है वह रिस्‍क फण्‍ड में क्रेडिट होती है और सरकारी सेवक के अभिदान से जमा होने वाली धनराशि इस सीमा तक कम हो जाती है।

13- समस्‍त कार्यालयों द्वारा अपने कार्यालय में इस आशय का एक लेजर या रजिस्‍टर रखना होगा जिसमें प्रत्‍येक मास प्रत्‍येक कर्मचारी से की गई कटौती का विवरण अंकित किया जायेगा। इससे यह लाभ होगा कि किसी भी समय यह ज्ञात किया जा सकता है कि अमुक कर्मचारी की किस माह से कटौती उसके वेतन से आरम्‍भ हुई है और इस कार्यालय में कब तक यह कटौती की गई है। सम्‍बन्‍धित कर्मचारी के उस कार्यालय से स्‍थानान्‍तरण होने पर इसी रजिस्‍टर से उसके अंतिम वेतन प्रमाण-पत्र में इस बात का उल्‍लेख किया जायेगा कि उसके वेतन से नियमित रूप्‍ से उसके स्‍थानान्‍तरण तक प्राप्‍त किये गये वेतन से कटौती की गई है। प्रत्‍येक कार्यालयाध्‍यक्ष/आहरण एवं वितरण अधिकारी अंतिम वेतन प्रमाण-पत्र में इस बात का उल्‍लेख किये जाने की दिशा में समुचित ध्‍यान रखेंगे।

14- चूंकि प्रत्‍येक कार्यालय के वेतन बिल चाहे वह राजपत्रित अधिकारियों के हों, अथवा अराजपत्रित कर्मचारियों के हों, प्रत्‍येक जिले के कोषागार द्वारा पारित किये जाते हैं, अत: प्रत्‍येक कोषागार में इस बात की सूचना उपलब्‍ध रहती है कि किस कार्यालय से किस माह में कितनी कटौती सामूहिक बीमा योजना के अन्‍तर्गत की गई है। प्रत्‍येक कोषाधिकारी द्वारा बीमा निदेशालय को प्रत्‍येक मास के अन्‍त में सामूहिक बीमा योजना के अन्‍तर्गत की गई कटौतियों के आंकड़े उपलब्‍ध कराये जाते हैं। यह सूचना प्रत्‍येक कोषाधिकारी द्वारा एक निर्धारित प्रपत्र पर उपलब्‍ध कराई जाती है, जिसके लिये प्रपत्र संख्‍या -10 निर्धारित किया गया है। संबंधित कोषागार इस प्रपत्र पर अपने कार्यालय में भी समुचित लेखा-जोखा रखेंगे तथा प्रत्‍येक उप-कोषागार से जो विवरण मांगने होंगे वह भी इसी प्रपत्र के अनुसार उनके कार्यालय में आयेंगे।

15- प्रत्‍येक दावा शासन को प्राप्‍त होने पर क्‍लेम्‍स रजिस्‍टर में दर्ज किया जायेगा। यह रजिस्‍टर एक निर्धारित प्रपत्र में रखा जायेगा जिसका प्रारूप जी॰आई॰एस॰ फार्म संख्‍या 3 में दिया गया है। स्‍पष्‍ट है कि प्रत्‍येक कार्यालयाध्‍यक्ष/विभागाध्‍यक्ष से फार्म संख्‍या 2 में जो सूचना प्राप्‍त होगी उसके आधार पर फार्म संख्‍या 3 रखा जायेगा। इसलिये यह अत्‍यन्‍त आवश्‍यक है कि जी॰आई॰एस॰ फार्म संख्‍या 2 में संबंधित कार्यालयाध्‍यक्ष/विभागाध्‍यक्ष द्वारा जो भी सूचना शासन को भेजी जायेगी वह सही होनी चाहिये। इसी क्‍लेम्‍स रजिस्‍टर में शासन द्वारा संबंधित व्‍यक्‍ति को जो भुगतान स्‍वीकृत किया जायेगा उसकी प्रविष्‍टियां भी की जायेगी तथा भुगतान चेक द्वारा अधिकृत किया जायेगा।

16-शासन द्वारा जो चेक जारी किये जायेंगे वह विशेष प्रकार के कागज पर मुद्रित फार्म पर लिखे जायेंगे। चेक का प्रारूप जी॰आई॰एस॰ फार्म संख्‍या 7 में निर्धारित है। यह चेक जारी होने के दिनांक के माह से तीसरे महीने के अंतिम दिवस तक प्रभावी होंगे और उसके उपरान्‍त यह स्‍वयं ही निरस्‍त समझे जायेंगे। यह चेक ‘‘नान’नेगेशियेबिल’’ तथा ‘‘एकाउन्‍ट पेयी’’ होंगे। शासन द्वारा जारी किये गये चेक केवल स्‍टेट बैंक आफ इंडिया अशोक मार्ग शाखा, लखनऊ, पर जारी किये जायेंगे और लेखा शीर्षक ‘‘870-चेक्‍स एण्‍ड बिल्‍स ग्रुप इंश्‍योरेन्‍स स्‍कीम चेक्‍स’’ के नामे डाले जायेंगे। हस्‍तलिखित चेकों पर क्रास इन्‍ट्री भी की जायेगी। जारी यिे गये चेकों का रजिस्‍टर जी॰आई॰एस॰ फार्म संख्‍या 8 में निर्धारित है। चेकों के पतिपर्ण (काउण्‍टर फाईल) पर बिल की संख्‍या तथा उसकी शुद्ध धनराशि को अलग-अलग दिखाया जायेगा और आवश्‍यकतानुसार योग भी निकाला जायेगा, जैसे यदि चेक किसी सेवारत मृतक कर्मचारी की विधवा को भुगतान हेतु जारी किया जा रहा है तो बीमा धनराशि, मृतक कर्मचारी के खाते में उपलब्‍ध धनराशि तथा उस पर ब्‍याज की धनराशि अलग-अलग दिखायी जायेगी और उसका योग भी प्रतिपर्ण पर अंकित किया जायेगा।

17- प्रपत्र संख्‍या 10 द्वारा जो सूचना प्रदेश के कोषागारों द्वारा शासन को भेजी जायेगी वह पुलिस विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों तथा अन्‍य समस्‍त शासन अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए अलग-अलग भेजनी होगी। यह सूचना प्राप्‍त होने पर शासन स्‍तर पर खोले गये प्राप्‍तियों के रजिस्‍टर में दर्ज की जायेगी जिसका प्रायप जी॰आई॰एस॰ फार्म संख्‍या 5 में निर्धारित किया गया है। इस रजिस्‍टर में कोषागारों में नकद जमा तथा बुक ट्रान्‍सफर से जमा धनराशियों के विवरण भी इंगित किये जायेंगे। कुल प्राप्‍तियों का मासिक योग एक अन्‍य रजिस्‍टर में ले लिया जायेगा जिसा प्रारूप जी॰आई॰एस॰ फार्म संख्‍या 6 में निर्धारित किया गया है। फार्म संख्‍या 6 में प्राप्‍तियों तथा भुगतानों का विवरण दो प्रतियों में रखा जायेगा और माह के अन्‍त में इनका योग निकाला जायेगा और शेष धनराशि प्रदर्शित की जायेगी। इसकी एक प्रति महालेखाकर, उत्‍तर प्रदेश-1, इलाहाबाद को प्रति मास भेजी जायेगी। प्राप्‍तियों तथा व्‍यय के आंकड़ों का मिलान महालेखाकर उत्‍तर प्रदेश, इलाहाबाद कार्यालय से 6 मास पर किया जायेगा। इस योजना के अन्‍तर्गत महालेखाकार, उत्‍तर प्रदेश इलाहाबाद को प्रत्‍येक मास प्राप्‍तियों तथा भुगतानों का मासिक विवरण शि¤यूल्‍स तथा वाउचरों सहित संबंधित माह के आगामी माह की 5 तारीख तक भेजा जायेगा। इसलिये इस योजना के अन्‍तर्गत लेखे/जोखे नियमित रूप से रखने होंगे और प्रत्‍येक कोषागार से जो विवरण प्राप्‍त होंगे उन्‍हें समय के अन्‍दर ही प्राप्‍त करना होगा। अत: प्रत्‍येक कोषागार इस बात को भलीभांति सुनिश्‍चित कर लें कि मासिक सूचनायें शासन को विलम्‍तम् 3 तारीख तक उपलब्‍ध हो जायें।

18- शासन द्वारा जो भुगतान चेकों से किये जायेंगे, वह जो एक निर्धारित अवधि तक ही प्रभावी होंगे जिसका उल्‍लेख ऊपर पैरा (4) में किया गया है। यह भी हो सकता है कि चेक जारी किया जाय वह किसी प्रकार खो जाय या फट जाय या विकृत हो जाय तो इस प्रकार निरस्‍तीकृत , कालातीत, खोये, फटे तथा विकृत चेकों का भुगतान संभव नहीं होगा और ऐसे चेक शासन को वापस लौटाने होंगे। भुगतान न हुए चेकों की तीन सूचियां बनाई जायेंगे जिनमें से दो सूचियां मासिक लेखे के साथ महालेखाकार, उत्‍तर प्रदेश-1, इलाहाबाद को भेजी जायेगी। पुराना चेक वापस प्राप्‍त हो जाने के उपरांत ही डुप्‍लीकेट चेक के रूप में नया चेक जारी होगा। नये चेक जारी करने के पूर्व पुराने प्राप्‍त हुए चेकों का भी लेखा-जोखा रखा जायेगा और यह लेखा जोखा जी॰आई॰एस॰ फार्म संख्‍या 9 में निर्धारित किया गया ह।

19- चूंकि दिनांक 29-2-80 तक की अवधि के लिये सामूहिक बीमा योजना का कार्यान्‍वयन भारतीय जीवन बीमा निगम के सहयोग से किया गया है और इस योजना के अन्‍तर्गत शासन ने प्रीमियम का भुगतान भी किया है, अत: दिनांक 29-2-80 तक उत्‍पन्‍न दावों के निस्‍तारण का दायित्‍व जीवन बीमा निगम का है। दिनांक 1-3-80 को जीवन बीमा निगम द्वारा शासन को ‘‘रिस्‍क प्‍लान’’ तथा ‘‘डिपाजिट एडमिनिस्‍ट्रेशन प्‍लान’’ के अन्‍तर्गत उपलब्‍ध धनराशियां वापस लौटानी हैं। इस प्रयोजन के लिये जीवन बीमा निगम द्वारा एक समयबद्ध कार्यक्रम सुनिश्‍चित करके शीघ्रता से कार्यवाही की जा रही है । शासन को प्राप्‍त होने वाली धनराशि की सही-सही वास्‍तविक तथ्‍यों तथा आंकड़ों के आधार पर सुनिश्‍चित की जायेगी।

20-सामूहिक बीमा एवं बचत योजना के अन्‍तर्गत सामान्‍यत: ऐसी कोई सम्‍भावना प्रतीत नहीं होती है जिसमें शासन को कोई हानि का अवसर आये। इस योजना में हानि का अवसर उसी समय हो सकता है जब ‘‘रिस्‍क फण्‍ड’’ में जमा धनराशि से अधिक धनराशि का भुगतान किसी वर्ष में बीमाधन के रूप में करने की आवश्‍यकता हो जाये। यदि ऐसा कभी कोई अवसर आयेगा भी तो शासन ‘‘रिस्‍क फण्‍ड’’ में जमा धनराशि से अधिक धनराशि का भुगतान स्‍वयं वहन करेगा और इसके लिये किसी कर्मचारी से कोई अतिरिक्‍त योगदान नहीं लिया जायेगा। दूसरे शब्‍दों में, इस योजना में यदि कभी कोई हानि होगी तो उस हानि की शत-प्रतिशत पूर्ति शासन द्वारा स्‍वयं की जायेगी।

21-इस योजना के अन्‍तर्गत ‘रिस्‍क फण्‍ड’ में उपलब्‍ध धनराशि के विरूद्ध समस्‍त सेवारत मृत्‍ये के दावों का भुगतान होगा तथा वर्ष के अन्‍त में जो धनराशि शेष बचेगी वह लाभ होगा। इस लाभ का 90 प्रतिशत अंश शासन द्वारा सरकारी सेवकों तथा उनके परिवारों के लिये कल्‍याणकारी योजनाओं पर एक बेनीवोलैण्‍ड फण्‍ड गठित करके उपयोग किया जायेगा। इस फण्‍ड के गठन तथा इसकी कार्यविधि के लिये समुचित निगम बनाये जायेंगे और ‘रिस्‍क फण्‍ड’ से प्राप्‍त लाभांश की धनराशि इस फण्‍ड में हस्‍तान्‍तरित की जायेगी।

22-सामूहिक बीमा एवं बचत योजना के अन्‍तर्गत प्राप्‍तियों तथा भुगतानों के संबंध में लेखा-जोखा राज्‍य सरकार के आय-व्‍ययक में निम्‍नलिखित लेखा शीर्षकों के अन्‍तर्गत रखा जायेगा :-

(1) प्रत्‍येक सरकारी सेवक के मासिक वेतन से की गयी कटौती की धनराशि प्राप्‍ति लेखा शीर्षक -‘‘088 सामाजिक सुरक्षा एवं कल्‍याण-अन्‍य प्राप्‍तियां कर्मचारी सामूहिक बीमा योजना का कार्यान्‍वयन राज्‍य कर्मचारियों का अभिदान (क) पुलिस विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों को छोड़कर शेष अन्‍य समस्‍त अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा (ख) पुलिस विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा’’ के अन्‍तर्गत क्रेडिट की जायेंगी।

(2) राज्‍य सरकार का इस योजना के अन्‍तर्गत देय अंशदान पर होने वाला व्‍यय लेखा शीर्षक ‘‘288 सामाजिक सुरक्षा एवं कल्‍याण अन्‍य सामाजिक सुरक्षा एवं कल्‍याण कार्यक्रम-क-अन्‍य बीमा योजनायें (1) कर्मचारी सामूहिक बीमा योजना का कार्यान्‍वयन 6- सहायक अनुदान/अंशदान/राज्‍य सहायता’’ के अर्न्‍तगत वहन किया जायेगा।

(3) सरकारी सेवकों से प्राप्‍त की गयी कुल धनराशि लेखा शीर्षक ‘088-’’ में क्रेडिट की जायेगी जिसे अन्‍तत: सामूहिक बीमा योजना निधि को संक्रमण किया जायेगा और इस प्रयोजन के लिये लेखा शीर्षक ‘288-सामाजिक सुरक्षा एवं कल्‍याण अन्‍य सामाजिक सुरक्षा एवं कल्‍याण कार्यक्रम-क-अन्‍य बीमा योजनायें-(2) राज्‍य सरकार कर्मचारी सामूहिक बीमा योजना निधि को संक्रमण अन्‍तरलेखा संक्रमण’’ के अधीन प्राविधान रखा जायेगा।

(4) सामूहिक बीमा एवं बचत योजना के अन्‍तर्गत कर्मचारियों अथवा उनके परिवारों को प्राप्‍त होने वाली वह धनराशि जो संबंधित कर्मचारी के बचत खाते से देय होगी, 6 प्रतिशत चक्रवृद्धि ब्‍याज सहित शासन द्वारा वापस की जायेगी। देय ब्‍याज की धनराशि का भुगतान आय-व्‍ययक के लेखा शीर्षक ‘249 ब्‍याज का भुगतान ख-अल्‍प बचतों, भविष्‍य निधियों आदि पर ब्‍याज-4 बीमा तथा पेंशन निधियों पर ब्‍याज-राज्‍य सरकार बीमा निधि पर ब्‍याज-2 कर्मचारी सामूहिक बीमा योजना पर ब्‍याज (भारत) के अन्‍तर्गत किया जायेगा।

(5) सरकारी सेवकों से प्राप्‍त धनराशि, शासन द्वारा दिये गये अंशदान की धनराशि तथा ब्‍याज के लिये व्‍यवस्‍थित धनराशियां संहत रूप से आय-व्‍ययक के लोक लेखा पक्ष के लेखा शीर्षक ‘811’’ के अधीन प्राप्‍तियों के रूप में क्रेडिट की जायेंगी और इसी लेखा शीर्षक के भुगतान पक्ष से समस्‍त भुगतान किये जायेंगे। इस लेखा शीर्षक के अन्‍तर्गत एक निधि का सृजन भी करना आवश्‍यक है। अत: इस प्रयोजन के लिये लेखा शीर्षक ‘‘811-बीमा और पेंशन निधियां -क-राज्‍य सरकार बीमा निधि-(1) कर्मचारी सामूहिक बीमा योजना निधि’’ के अधीन कर्मचारी सामूहिक बीमा योजना निधि गठित की गई है।

23- यह आदेश दिनांक 1 अक्‍­बर, 1981 से प्रभावी किये जाते हैं और ऊपर पैरा 1 के पार्श्‍व में उल्‍लिखित शासनादेश इसी दिनांक से निरस्‍त किये जाते हैं।

भवदीय,

जे॰ एल॰ बजाज,

सचिव।