पत्र संख्‍या-2123(2)/दो-4-2010-45(12)/91-टी.सी.-6

प्रेषक,

कुंवर फतेह बहादुर,

प्रमुख सचिव,

उत्‍तर प्रदेश शासन।

सेवा में,

महानिबन्‍धक,

उच्‍च न्‍यायालय,

इलाहाबाद।

नियुक्‍ति अनुभाग-4                              लखनऊ दिनांक, 16 अक्‍­बर, 2010

विषय:- रिट याचिका संख्‍या-1022/89, आँल इण्‍डिया जजेज़ एसोसियेशन व अन्‍य बनाम यूनियन आँफ इण्‍डिया व अन्‍य में सम्‍बद्ध आई.ए. संख्‍या-244/09 में मा. उच्‍चतम न्‍यायालय के आदेश दिनांक 19.7.2010 के अनुपालन में उ. प्र. न्‍यायिक सेवा/उच्‍चतर न्‍यायिक सेवा के अधिकारियों को पद्मनाभन समिति की संस्‍तुतियों के अनुरूप भत्‍ते एवं अन्‍य सुविधाएं प्रदान किये जाने के सम्‍बन्‍ध में।

महोदय,

रिट याचिका सं.-1022/1989 आल इण्‍डिया जजेज एसोसिएशन व अन्‍य बनाम यूनियन आफ इण्‍डिया व अन्‍य में योजित आई.ए. संख्‍या-244/2009 में मा. उच्‍चतम न्‍यायालय के आदेश दिनांक 28.4.2009 द्वारा गिठत पद्मनाभन समिति की संस्‍तुतियों में भत्‍तों एवं अन्‍य सुविधाओं को मा. उच्‍चतम न्‍यायालय द्वारा अपने आदेश दिनांक 19.7.2010 में यथावत स्‍वीकार कर लिया गया है।

2- उल्‍लेखनीय है कि जस्‍टिस ई. पद्मनाभन समिति की संस्‍तुतियों के अनुसार राज्‍य के न्‍यायिक/उच्‍चतर न्‍यायिक सेवा के अधिकारियों के पुनरीक्षित वेतनमानों एवं वेतन निर्धारण की व्‍यवस्‍था शासनादेश संख्‍या-793/दो-4-2010-45(12)/91,टी.सी.-6 दिनांक 30.4.2010 एवं शासनादेश संख्‍या-1420/दो-4-2010-45(12)/91, टी.सी.-6 दिनांक 31.5.2010 द्वारा की गयी व्‍यवस्‍था अपरिवर्तनीय रहेगी।

3- अत: उक्‍त के अतिरिक्‍त मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि जस्‍टिस पद्मनाभन समिति की संस्‍तुतियों के क्रम में मा. उच्‍चतम न्‍यायालय के आदेश दिनांक 19.7.2010 के अनुपालन में उ. प्र. राज्‍य के न्‍यायिक सेवा एवं उच्‍चतर न्‍यायिक सेवा के अधिकारियों को भत्‍तों/अगि्रम/सुविधाओं को निम्‍नानुसार स्‍वीकृत किए जाने की राज्‍यपाल महोदय सहर्ष स्‍वीकृति प्रदान करते हैं:-

(1)

चिकित्‍सा भत्‍ता/चिकित्‍सा सुविधा-

चिकित्‍सा भत्‍ता तत्‍काल प्रभाव से पुनरीक्षित करते हुए रू. 1,000.00 प्रतिमाह की दर से सभी न्‍यायिक अधिकारियों को अनुमन्‍य होगा। इसके अतिरिक्‍त वर्तमान में लागू शासनादेश सं. 6058/दो-4-05-45(12)/91 टी.सी. दिनांक 27.1.2006 में उद्धरित शर्तें यथावत रहेंगी। साथ ही चिकित्‍सा प्रतिपूर्ति के बारे में उ.प्र. राज्‍य के कर्मचारियों के लिए जारी पूर्व शासनादेश संख्‍या- 1209/ट-6-2004-294/96 टी.सी. दिनांक 9.8.2004 की शर्तें यथावत रहेंगी।

(2)

अवकाश यात्रा सुविधा-

इस सम्‍बन्‍ध में वर्तमान में शासनादेश संख्‍या-6058/ दो-4-05-45(12)/91टी.सी. दिनांक 27.1.2006 द्वारा अनुमन्‍य व्‍यवस्‍था निम्‍न संशोधन सहित लागू होगी-

 

(क)

न्‍यायिक अधिकारी को 02 वर्ष की सेवा तथा प्रोबेशन अवधि सफलतापूर्वक पूर्ण होने के उपरान्‍त एल.टी.सी. की सुविधा पूर्व निर्धारित 4 वर्ष के ब्‍लाक में एक बार के प्रतिबंध के साथ स्‍वीकृत की जाएगी।

 

(ख)

इसके अतिरिक्‍त न्‍यायिक अधिकारियों को उनके सेवाकाल के अंतिम वर्ष में भी यह सुविधा प्रदान की जाएगी।

(3)

अवकाश नकदीकरण-

इस संबंध में भी वर्तमान में शासनादेश सं.-6058/ दो-4-05-45(12)/91टी.सी. दिनांक 27.1.2006 में प्रदत्‍त व्‍यवस्‍था यथावत लागू रहेगी।

(4)

स्‍थानान्‍तरण अनुदान/डिस्‍टरबेंस एलाउंस

इस सुविधा के बारे में भी वर्तमान में लागू शासनादेश संख्‍या-6058/दो-4-05-45(12)/91टी.सी. दिनांक 27.1.2006 द्वारा अनुमन्‍य व्‍यवस्‍था लागू रहेगी।

(5)

प्रस्‍तर-1 में प्रदत्‍त चिकित्‍सा सुविधा भत्‍ता तत्‍काल प्रभाव से लागू माना जायेगा इसके अतिरिक्‍त उपरोक्‍त सभी भत्‍ते दिनांक 1.1.2006 से ही प्रदत्‍त होंगे तथा इनका एरियर भुगतान यदि कोई बनता हो तो मा. उच्‍चतम न्‍यायालय के आदेश दिनांक 19.7.2010 के अनुपालन में एरियर का 60 प्रतिशत तीन माह के भीतर दिया जायेगा एवं शेष 40 प्रतिशत एरियर का भुगतान 09 माह के भीतर दिया जाना सुनिश्‍चित किया जायेगा।

(6)

यह आदेश वित्‍त (सामान्‍य) अनुभाग-2 के अशासकीय संख्‍या-जी(2)-1093/दस-2010 दिनांक 29.09.2010 में प्राप्‍त सहमति से जारी किए जा रहे हैं।

भवदीय,

(कुँवर फतेह बहादुर)

प्रमुख सचिव।