वित्‍त (वेतन आयोग) -1

वे.आ.-1-480/दस-2010-42(एम)/08 लखनऊ :

दिनांक 19 जुलाई, 2010

राज्‍य कर्मचारियों और सहायता प्राप्‍त शिक्षण एवं प्राविधिक शिक्षण संस्‍थाओं तथा शहरी स्‍थानीय निकायों के कर्मचारियों को महंगाई भत्‍ते का भुगतान दिनांक 01.01.2010 से लागू बढ़ी हुई दर पर भुगतान।

पिठत निम्‍नलिखित:-

(1) शासनादेश संख्‍या वे.आ.-1-26/दस-2010-42 (एम)/08, दिनांक 05 जनवरी, 2010

(2) भारत सरकार, वित्‍त मंत्रालय, व्‍यय विभाग के कार्यालय ज्ञापन संख्‍या-1(3)/2010-ई-ii(बी), दिनांक 26 मार्च, 2010

उपर्युक्‍त विषय पर मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि शासनादेश संख्‍या-वे.आ.-1-26/दस-2010-42(एम)/08, दिनांक 15.01.2010 के क्रम में राज्‍यपाल महोदय ने प्रदेश के समस्‍त पूर्णकालिक नियमित राज्‍य कर्मचारियों, सहायता प्राप्‍त शिक्षण एवं प्राविधिक शिक्षण संस्‍थाओं तथा शहरी स्‍थानीय निकायों के नियमित एवं पूर्णकालिक कर्मचारियों तथा यू.जी.सी. वेतनमानों में कार्यरत पदधारकों को दिनांक 01 जनवरी, 2010 से निम्‍नानुसार संशोधित दर पर महंगाई भत्‍ते के भुगतान की स्‍वीकृति सहर्ष प्रदान कर दी है-

तिथि जब से देय है

महंगाई भत्‍ते की मासिक दर

01.01.2010

मूल वेतन का 35 प्रतिशत

2. इस शासनादेश द्वारा स्‍वीकृत महंगाई भत्‍ते के आगणन हेतु 'मूल वेतन' का तात्‍पर्य दिनांक 01.01.2006 से लागू पुनरीक्षित वेतन-संचना में कर्मचारियों को अनुमन्‍य वेतन बैंड में 'वेतन' तथा अनुमन्‍य 'ग्रेड वेतन' के योग से होगा, किन्‍तु नियत वेतनमान में अनुमन्‍य वेतन ही मूल वेतन माना जायेगा। परन्‍तु उक्‍त के अतिरिक्‍त अन्‍य प्रकार के वेतन जैसे विशेष वेतन, सीमान्‍त विशेष वेतन/भत्‍ता, वैयक्‍तिक वेतन, प्रतिनियुक्‍ति भत्‍ता/वेतन तथा अन्‍य भत्‍ते आदि भले ही वे मूल नियम के अन्‍तर्गत वेतन की परिभाषा में आते हों, को मूल वेतन के साथ सम्‍मिलित नहीं किया जायेगा। परन्‍तु प्रेक्‍टिस बन्‍दी भत्‍ता को 'वेतन' का अंश माना जायेगा अर्थात प्रेक्‍टिस बन्‍दी भत्‍ता को महंगाई भत्‍ता के आगणन हेतु सम्‍मिलित किया जायेगा।

3. महंगाई भत्‍ते को एक तरह का विशिष्‍ट घटक ही माना जायेगा तथा वित्‍तीय नियम-9(21) के अंतर्गत वेतन नहीं माना जायेगा।

4. इन आदेशों द्वारा स्‍वीकृत महंगाई भत्‍ता उन कर्मचारियों/शिक्षकों को भी, जो प्रभावी तिथि को सेवारत थे किन्‍तु इस शासनादेश के जारी होने के पूर्व जिनकी सेवायें चाहे जिन कारणों से यथा अनुशासनिक कारणों से या त्‍याग-पत्र, सेवा-निवृत्‍त, मृत्‍यु या सेवा-मुक्‍त करने या स्‍वीकृत पदों की समाप्‍ति के कारण समाप्‍त हो गयी हो, सेवा-समाप्‍ति, सेवा निवृत्‍ति आदि की तिथि तक अनुमन्‍य होगा।

5. इन आदेशों द्वारा स्‍वीकृत महंगाई भत्‍ते की देय धनराशि को निकटतम एक रूपये में पूणांर्कित किया जायेगा अर्थात 50 पैसे और उससे अधिक को उच्‍चतर रूपये पर पूर्णांकित किया जायेगा और 50 पैसे से कम के राशि को छोड़ दिया जायेगा।

6. इन आदेशों द्वारा स्‍वीकृत दरों पर महंगाई भत्‍ते की दिनांक 01 जनवरी, 2010 से दिनांक 31 जुलाई, 2010 तक की देय अवशेष धनराशि अधिकारी/कर्मचारी के भविष्‍य निधि खाते में, अवशेष धनराशि पर देय आयकर एवं सरचार्ज की कटौती की सुविधा के अधीन जमा की जायेगी और इस प्रकार जमा धनराशि को भविष्‍य निधि खाते में दिनांक 01 अगस्‍त, 2010 से जमा माना जायेगा और इस तिथि से उक्‍त धनराशि पर ब्‍याज भविष्‍य निधि पर लागू दर से देय होगा इस प्रकार भविष्‍य निधि खाते में जमा की गई अवशेष धनराशि दिनांक 31 जुलाई, 2011 तक संबंधित अधिकारी/कर्मचारी के खाते में जमा रहेगी और इसे उन मामलों को छोड़कर जिनमें भविष्‍य निधि नियमों के अंतर्गत अन्‍तिम प्रत्‍याहरण (Final Withdrawl) देय हो जाय, उक्‍त तिथि से पूर्व नहीं निकाला जा सकेगा। इन आदेशों द्वारा स्‍वीकृत महंगाई भत्‍ते की बढ़ी हुई धनराशि का भुगतान दिनांक 01 अगस्‍त, 2010 से (माह अगस्‍त, 2010 का भुगतान दिनांक 01 सितम्‍बर, 2010 को देय) नकद किया जायेगा। वसे अधिकारी/कर्मचारी जिनका भविष्‍य निधि खता न खुला हो देय अवशेष नेशनल सेविंग सिर्टफिकेट (एन.एस.सी.) के रूप में दी जायेगी परन्‍तु धनराशि के जिस अंश का सिर्टफिकेट उपलब्‍ध न हो वह उसे नकद दी जायेगी। महंगाई भत्‍ते की सामान्‍य भविष्‍य निधि लेखा में जमा की जाने वाली अवशेष धनराशि से संबंधित बिल/शेड्यूल/चालान पर शासनादेश संख्‍या 4-12/दस-97-500 (1)/97, दिनांक 7.10.1997 में निहित आदेशानुसार निर्धारित मोहर लगायी जानी चाहिए।

7. जिन अधिकारियों/कर्मचारियों की सेवायें इस शासनादेश के जारी होने की तिथि से पूर्व समाप्‍त हो गई हो अथवा जो अधिकारी/कर्मचारी अधिवर्षता की आयु प्रप्‍त कर दिनांक 01 जनवरी, 2010 से शासनादेश निर्गत होने की तिथि तक सेवानिवृत्‍त हो गये हो अथवा 06 माह के अन्‍दर सेवानिवृत्‍त होने वाले हों उनको देय महंगाई भत्‍ते के बकाये की सम्‍पूर्ण धनराशि का भुगतान नकद किया जायेगा।

(अनूप मिश्र) प्रमुख सचिव।