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वित्‍त(आय-व्‍ययक) अनुभाग-4

सं.बी-4-310/दस-2008/6-1965

लखनऊ, दि. 31 मार्च, 2008

कार्यालय-ज्ञाप

     राज्‍य सरकार द्वारा दिये जाने वाले विभिन्‍न प्रकार के ऋणों एवं अग्रिमों (स्‍वायत्‍तशासी निकायों को जल सम्‍पूर्ति योजना के लिये ऋण को छोड़कर) पर वित्‍तीय वर्ष 2006-2007 तथा वर्ष 2007-2008 के लिए ब्‍याज की अन्‍तिम रूप से प्रभावी दरें निम्‍नलिखित होंगी-

क्र.

ऋण की किस्‍त

ऋण की अवधि

वित्‍तीय वर्ष 2006-07 में स्‍वीकृत ऋणों पर प्रभावी ब्‍याज दरें (प्रतिशत प्रतिवर्ष)

वित्‍तीय वर्ष 2007-08 में स्‍वीकृत ऋणों पर प्रभावी ब्‍याज दरें (प्रतिशत प्रतिवर्ष)

1

2

3

4

5

1

यू.पी.एफ.सी. पिकय, यू.पी.एस.आई.डी.सी.यू.पी.एस.आई.सी. आदि जैसी संस्‍थाओं जो औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने का कार्य करती है, को ऋण

10 वर्ष की अवधि तक

11.50

11.50

2

(क) सार्वजनिक एवं सहकारी क्षेत्रों में मध्‍यम एवं वृहत स्‍तरीय, औद्योगिक एवं वाणिज्‍यिक संस्‍थाओं को कार्यशील पूंजी, अर्थोपाय अग्रिम एवं कैश डेफिसिट के लिये ऋण

3 से 5 वर्ष की अवधि तक

14.50

14.50

 

(ख) ‘‘क’’ में वर्णित संस्‍थाओं को कार्यशील पूंजी अर्थोपाय अग्रिम एवं कैश डेफिसिट से भिन्‍न ऋण

10 वर्ष की अवधि तक

11.50

11.50

3

(क) सार्वजनिक एवं सहकारी क्षेत्रों में लघु स्‍तरीय औद्योगिक एवं वाणिज्‍यिक संस्‍थाओं को कार्यशील पूंजी, अर्थोपाय अग्रिम एवं कैश डेफिसिट के लिए ऋण

3 से 5 वर्ष की अवधि तक

14.50

14.50

 

(ख) ‘‘क’’ में वर्णित संस्‍थाओं को कार्यशील पूंजी, अर्थोपाय अग्रिम एवं कैश डेफिसिट से भिन्‍न ऋण

10 वर्ष की अवधि तक

11.50

11.50

4

लघुत्‍तर उद्योगों के लिये ऋण

4 वर्ष की अवधि तक 4 वर्ष से अधिक किन्‍तु 9 वर्ष की अधिक नहीं

9.00

9.00

5

उ. प्र. पावर कारपोरेशन लि. उ. प्र. राज्‍य विद्युत उत्‍पादन निगम, उ. प्र. जल विद्युत उत्‍पादन निगम तथा यू.पी.एस.आर. टी. सी. को ऋण

10 वर्ष की अवधि तक

11.50

11.50

6

उ. प्र. पावर कारपोरेशन लि. उ. प्र. राज्‍य विद्युत उत्‍पादन निगम उ. प्र. जल विद्युत उत्‍पादन निगम तथा यू.पी.एस.आर. टी.सी. को ऋण

अर्थोपाय ऋण 3 वर्ष तक

11.50

11.50

7

अन्‍य ऋण

10 वर्ष की अवधि तक

11.50

11.50

2.   स्‍वीकृत ऋणों पर देय ब्‍याज की गणना वित्‍तीय नियम संग्रह खण्‍ड-5 भाग-एक के पैरा 225 में दिये निर्देशों के अनुसार की जायेगी।

3.   ब्‍याज की उक्‍त दरें प्रभावी (इफेक्‍टिव) दरें हैं। स्‍वीकृति आदेशों में ब्‍याज की दरें उपरोक्‍त प्रभावी दरों से 3.5 प्रतिशत (साढ़े तीन प्रतिशत) अधिक निर्धारित की जायेंगी और उनमें इस आशय की शर्त रहेगी कि नियत समय पर ऋण/ब्‍याज का प्रतिदान/भुगतान करने की दशा में 3.5 प्रतिशत (साढ़े तीन प्रतिशत) की छूट दी जायेगी अर्थात् प्रभावी दर (इफेक्‍टिव रेट) पर ही ब्‍याज लिया जायेगा। ऋण/ब्‍याज का समय से प्रतिदान/भुगतान न होने पर अथवा कोई किश्‍त कालातीत होने पर ऋण की स्‍वीकृति के आदेश में निर्धारित दर पर ही ब्‍याज देना होगा अर्थात् ब्‍याज की दर में कोई छूट नहीं दी जायेगी। इस संबंध में यह भी स्‍पष्‍ट किया जाता है कि ऋण/ब्‍याज का समय से प्रतिदान/भुगतान करने में वितथ (डिफाल्‍ट) होने पर स्‍वीकृति के आदेश में निर्धारित दर पर ही ब्‍याज देना होगा अर्थात् ब्‍याज की दर में कोई छूट नहीं दी जायेगी। ब्‍याज की दण्‍डात्‍मक दर मूल राशि और/अथवा ब्‍याज की अतिदेय किश्‍तों पर उसकी अदायगी की निश्‍चित तिथि से वास्‍तविक अदायगी की तिथि से ठीक पूर्व की तिथि तक लागू रहेगी।

4.   तकाबी नियमों के अन्‍तर्गत दिये जाने वाले ऋणों पर ब्‍याज की दरों के आदेश पृथक से राजस्‍व व कृषि विभाग द्वारा निर्गत किये जाते हैं। राज्‍य कर्मचारियों को दिये जाने वाले ऋणों और अग्रिमों पर ब्‍याज की दरें अलग से निर्धारित की जाती हैं।

5.   साधारणत: किसी भी ऋण की प्रतिदान अवधि 10 वर्ष से अधिक नहीं होगी, किन्‍तु ऐसे मामलों, जिनमें प्रतिदान की अवधि बढ़ाया जाना आवश्‍यक हो, शासन को संदिभर्त किये जायें। ऋण की प्रतिदान अवधि ऋण के उद्देश्‍यों को ध्‍यान में रखकर निर्धारित की जाये और इसे कम से कम अवधि के लिये ही सीमित रखा जाये।

6.   निर्धारित तिथि से पूर्व अदा की गयी किसी भी किश्‍त को पूरी तरह मूल राशि के लिये ही समझा जायेगा बशर्ते उसके साथ अद्यतन तिथि तक किश्‍त की वास्‍तविक अदायगी के लिये देय ब्‍याज भी हो।। अगर ऐसा नहीं है तो किश्‍त की राशि पहले पूर्ववर्ती और चालू अवधि के लिये ब्‍याज के साथ समायोजित की जायेगी अगर कोई शेष राशि हो तो उसे मूल राशि के साथ प्रयुक्‍त किया जायेगा। जहां किश्‍त अदायगी निश्‍चित तिथि से 14 अथवा उसके कम दिन पहले की गयी हो तो ब्‍याज पूरी अवधि (आधा तथा पूरा वर्ष जैसा भी मामला हो) के लिये देय होगा।

7.   यदि किसी योजना पर ब्‍याज की दर, जो अन्‍तिम नहीं है अनुच्‍छेद-1 से 4 में दी गयी ब्‍याज की दरों से अधिक है, तो ऐसी स्‍थिति में अधिक ब्‍याज की दर लागू रहेगी।

8.   यदि ऋण की अवधि में संशोधन करके अवधि बढ़ायी जाती है तो ब्‍याज की दर लम्‍बी अवधि से समतुल्‍य होगी मानों ऋण बढ़ी हुई अवधि के लिये स्‍वीकृत किया गया था। ऐसे मामलों में यदि ऋण की वापसी-अदायगी शुरू हो चुकी हो तो ऋण की अवधि में विस्‍तार किये जाने की तारीख तक ऋण के बचे भाग पर ब्‍याज की संशोधित दर लागू होगी।

9.   उन मामलों में जहां ऋणों को रियायती दर पर अथवा ब्‍याज मुफ्त ऋण स्‍वीकृत किया जाता है वापसी-अदायगी में कोई चूक होने पर अथवा ऋण का उपयोग होने भिन्‍न प्रयोजन के लिये किये जाने की स्‍थिति में ऋणों पर सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित समान दरों से 1/4 प्रतिशत अधिक दण्‍डात्‍मक ब्‍याज प्रभावी होगा।

10.  यदि किसी मामले, में इस कारण ब्‍याज रियायती दर पर लिया जाता है कि राज्‍य सरकार द्वारा दिये जाने वाले साधारण ब्‍याज की दर के अन्‍तर के बराबर भारत सरकार द्वारा अनुदान दिया जाता है तो ऐसे समस्‍त मामले तुरन्‍त वित्‍त विभाग को ब्‍याज दर निर्धारित करने के लिये भेज दिये जाने चाहिए तथा साथ में भारत सरकार के नवीनतम लिखित आदेश की एक प्रति भी भेजी जानी चाहिए जिसमें ब्‍याज की दर को सहायतित करने की सहमति प्रदान की गयी हो।

11.  जिन मामलों में राज्‍य सरकार भारत सरकार से प्राप्‍त धनराशि का ऋण उनके एजेन्‍ट के रूप में स्‍वीकृत करती है और उसमें भारत सरकार की यह शर्त होती है कि अन्‍तिम ऋण गृहीता को एक निर्धारित ब्‍याज की दर पर ही ऋण दिया जायेगा तो ऐसी स्‍थिति में भारत सरकार द्वारा निर्धारित ब्‍याज की दर ही लागू रहेगी। इसी प्रकार जहां राज्‍य सरकार द्वारा स्‍वायत्‍तशासी संस्‍थाओं (जैसे राष्‍ट्रीय सहकारी विकास निगम तथा खादी ग्रामोद्योग आयोग आदि) से प्राप्‍त धनराशि से ऋण दिया गया हो तो ब्‍याज की दर वही होगी जो उस संस्‍था द्वारा वित्‍तीय वर्ष 2006-2007 एवं वर्ष 2007-2008 के लिये निर्धारित की गयी हो, यदि यह शर्त राज्‍य सरकार ने मान ली हो।

12.  राजकीय उपक्रम/निगम तथा अन्‍य राजकीय स्‍वायत्‍तशासी संस्‍थायें, कार्यशील पूंजी संबंधी आवश्‍यकताओं की पूर्ति अपने सम्‍पत्‍ति (जैसे सामग्री, भण्‍डार, कच्‍चा माल, तैयार माल, प्रगति पर चल रहे कार्यों आदि) को बन्‍धक रखकर भारतीय स्‍टेट बैंक/राष्‍ट्रीयकृत बैंकों से प्राप्‍त कर सकते हैं। अत: सहकारी उपक्रमों आदि को सामान्‍यत: कार्यशील पूंजी के लिये ऋण स्‍वीकृत करने संबंधी प्रस्‍तावों को स्‍वीकार्य नहीं किया जायेगा। लेकिन, यदि विशेष परिस्‍थितियों में कार्यशील पूंजी हेतु ऋण स्‍वीकृत किया जाता है तो इस ऋण की अवधि 3 वर्ष से अधिक नहीं होगी। अर्थोपाय अग्रिमों की वसूली एक वर्ष के अन्‍दर की जायेगी।

13.  राजकीय निगमों/उपक्रमों के लिये दिये जाने वाले ऋणों के संबंध में कार्यालय ज्ञाप संख्‍या बी-4-3773/दस-6/65, दिनांक 15 फरवरी, 1973 में उल्‍लिखित निर्देशों के अनुसार कार्यवाही की जाये।

बी.एम.जोशी,

सचिव।

अग्रिमों