Medical Facilities

चिकित्‍सा अनुभाग-6

3055/पाँच-6-2007

दिनांक,11 फरवरी, 2008

विषय:-उत्‍तर प्रदेश के सरकारी सेवकों की चिकित्‍सा परिचर्या के सम्‍बन्‍ध में दिशा-निर्देश।

     उत्‍तर प्रदेश के सेवारत एवं सेवा निवृत्‍त सरकारी सेवकों तथा उनके परिवार के आश्रित सदस्‍यों की प्रदेश के भीतर एवं प्रदेश के बाहर कराये गये चिकित्‍सा पर हुए व्‍यय की प्रतिपूर्ति के सम्‍बन्‍ध में अत्‍याधिक संख्‍या में प्राप्‍त हो रहे दावों के त्‍वरित निस्‍तारण में अनुभव की जा रही व्‍यवहारिक किठनाइयों के दृष्‍टिगत शासनादेश संख्‍या-1209/पाँच-6-2004-294/96 टी.सी. दिनांक 09 अगस्‍त 2004 द्वारा शासन के प्रशासनिक विभागों, विभागाध्‍यक्षों एवं कार्यालयाध्‍यक्षों को किये गये प्रतिनिधायन की सीमा बढ़ाये जाने के निर्देश जारी किये गये थे। उक्‍त निर्देशों के बावजूद प्राय: यह देखने में आ रहा है कि चिकित्‍सा प्रतिपूर्ति के अधिकांश प्रकरण चिकित्‍सा विभाग को संदिभर्त कर दिये जाते हैं जिससे चिकित्‍सा विभाग पर न केवल अत्‍यधिक कार्यभार बढ़ता है अपितु प्रकरणों के निस्‍तारण में अप्रत्‍याशित विलम्‍ब भी होता है।

2.   उपरोक्‍त कार्याधिक्‍य व अप्रत्‍याशित विलम्‍ब के समाधान हेतु सम्‍यक् विचारोपरान्‍त मुझे यह कहने का निर्देश हुआ है कि शासनादेश दिनांक 09.08.2004 में निहित व्‍यवस्‍था के अनुसार चिकित्‍सा प्रतिपूर्ति के दावों के प्रदेश के बाहर एवं अन्‍दर जिस सीमा तक स्‍वीकृत करने के अधिकार प्रतिनिधानित किये गये हैं उक्‍त सीमा तक की कार्योत्‍तर स्‍वीकृति भी उन्‍हीं प्राधिकारियों द्वारा की जा सकती है।

3.   उपरोक्‍त के अतिरिक्‍त सेवारत कार्मिकों एवं उनके आश्रितों के उपचार हेतु कार्मिक के लिखित आवेदन पर संदिभर्त चिकित्‍सालयह संस्‍थान के प्रमुख/मुख्‍य चिकित्‍सा अधीक्षक/प्रभारी प्रशासक द्वारा दिये गये व्‍यय प्राक्‍कलन के आधार पर शासनादेश दिनांक 09.08.2004 के प्रस्‍तर-2 में उल्‍लिखित स्‍वीकर्ता अधिकारी जिस सीमा तक चिकित्‍सा प्रतिपूर्ति हेतु सक्षम है उसके 75 प्रतिशत तक चिकित्‍सा अगि्रम स्‍वीकृत करने के लिए भी अधिकृत है। रुपये 2,00,000/- से अधिक के चिकित्‍सा अगि्रम के मामले में प्रशासकीय विभाग द्वारा वित्‍त विभाग की सहमति प्राप्‍त करनी होगी।

4.   यह आदेश तत्‍काल प्रभाव से लागू माने जाएंगे तथा इस सम्‍बन्‍ध में पूर्व में जारी शासनादेश उपरोक्‍त सीमा तक संशोधित माने जाएंगे।

5.   यह आदेश वित्‍त विभाग की अशासकीय संख्‍या-जी (2)132/दस-2008 दिनांक 31 जनवरी, 2008 में प्राप्‍त उनकी सहमति से जारी किये जा रहे हैं।

प्रशान्‍त त्रिवेदी, सचिव।