Citizen Charter

अधिसूचना/ विविध

संविधान के अनुच्‍छेद 213 के खण्‍ड (1) द्वारा प्रदत्‍त शक्‍तियों का प्रयोग करके राज्‍यपाल महोदय ने निम्‍नलिखित उत्‍तर प्रदेश जनहित गारन्‍टी अध्‍यादेश, 2011 (उत्‍तर प्रदेश अध्‍यादेश संख्‍या 1 सन् 2011) प्रख्‍यापित किया है जो इस अधिसूचना द्वारा सर्वसाधारण की सूचनार्थ प्रकाशित किया जाता है।

उत्‍तर प्रदेश जनहित गारन्‍टी अध्‍यादेश, 2011

(उत्‍तर प्रदेश अध्‍यादेश संख्‍या 1 सन् 2011)

(भारत गणराज्‍य के इकसठवें वर्ष में राज्‍यपाल द्वारा प्रख्‍यापित अध्‍यादेश)

राज्‍य की जनता को निश्‍चित समय सीमा के भीतर सेवाएं प्रदान करने तथा उससे संबंधित और आनुषंगिक विषयों का व्‍यवस्‍था करने के लिए

अध्‍यादेश

चूँकि राज्‍य विधान मण्‍डल सत्र में नहीं है और राज्‍यपाल का यह समाधान हो गया है कि वसी परिस्‍थितियों विद्यमान है जिनके कारण उन्‍ह- तुरन्‍त कार्यवाही करना आवश्‍यक हो गया है;

अतएव, अब संविधान के अनुच्‍छेद 213 के खण्‍ड (1) द्वारा प्रदत्‍त शक्‍ति का प्रयोग करके राज्‍यपाल निम्‍नलिखित अध्‍यादेश प्रख्‍यापित करते हैं:-

1.

संक्षिप्‍त नाम, विस्‍तार और प्रारम्‍भ

     
     

(1)

यह अध्‍यादेश उत्‍तर प्रदेश जनहित गारण्‍टी अध्‍यादेश, 2011 कहा जायेगा।

 

(2)

इसका विस्‍तार सम्‍पूर्ण उत्‍तर प्रदेश में होगा।

 

(3)

यह ऐसे दिनांक से प्रवृत्‍त होगा, जैसा राज्‍य सरकार, गजट में अधिसूचना द्वारा नियत करे।

2.

परिभाषाएं

   
   

2-

जब तक कि संदर्भ से अन्‍यथा अपेक्षित न हो इस अध्‍यादेश में-

(क)

''पदाभिहित अधिकारी'' का तात्‍पर्य, धारा 3 के अधीन सेवा प्रदान करने के लिए इस रूप में अधिसूचित किसी अधिकारी से है;

(ख)

''पात्र व्‍यक्‍ति'' का तात्‍पर्य अधिसूचित सेवा के लिए पात्र किसी व्‍यक्‍ति से है;

(ग)

''प्रथम अपील अधिकारी'' का तात्‍पर्य धारा 3 के अधीन इस रूप में अधिसूचित किसी अधिकारी से है;

(घ)

''सेवा की अधिकार'' का तात्‍पर्य नियत समय सीमा के भीतर धारा 4 के अधीन सेवा प्राप्‍त करने के अधिकार से है;

(ङ)

''सेवा'' का तात्‍पर्य धारा 3 के अधीन अधिसूचित किसी सेवा से है;

(च)

''द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी'' का तात्‍पर्य धारा 3 के अधीन इस रूप में अधिसूचित किसी अधिकारी से है;

(छ)

''नियत समय सीमा'' का तात्‍पर्य धारा 3 के अधीन अधिसूचित पदाभिहित अधिकारी द्वारा सेवा प्रदान करने अथवा प्रथम अपील अधिकारी द्वारा अपील का विनिश्‍चय करने का अधिकतम समय से है;

सेवाओं, पदाभिहित अधिकारियों प्रथम अपील अधिकारियों द्वितीय अपील प्राधिकारी तथा नियत समय सीमाओं की अधिसूचना

3-

राज्‍य सरकार, समय-सीमा पर सेवाओं, पदाभिहित अधिकारियों, प्रथम अपील अधिकारियों, द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी तथा नियत समय सीमा को अधिसूचित कर सकेगी।

नियत समय सीमा के भीतर सेवा प्राप्‍त करने का अधिकार

4-

पदाभिहित अधिकारी भाग 3 के अधीन अधिसूचित सेवा पात्र व्‍यक्‍ति को उपलब्‍ध करायेगा।

नियत समय सीमा में सेवा उपलब्‍ध कराना

5-

(1)

 

नियत समय सीमा, अधिसूचित सेवा के लिए अपेक्षित आवेदन, पदाभिहित अधिकारी या उसके अधीनस्‍थ आवेदन प्राप्‍त करने के लिए प्राधिकृत किसी व्‍यक्‍ति को, प्रस्‍तुत करने के दिनांक से प्रारम्‍भ होगी। ऐसे आवेदन की सम्‍यक् रूप से अभिस्‍वीकृति दी जायेगी।

(2)

 

पदाभिहित अधिकारी, उपधारा (1) के अधीन आवेदन प्राप्‍त होने पर समय सीमा के भीतर या तो सेवा उपलब्‍ध करायेगा या आवेदन अस्‍वीकृत करेगा और आवेदन अस्‍वीकृत करने के मामले में वह कारणों को लिखित में अभिलिखित करेगा और आवेदक को सूचित करेगा।

अपील

6-

(1)

 

कोई व्‍यक्‍ति, जिसका आवेदन धारा 5 की उपधारा (2) के अधीन अस्‍वीकृत कर दिया जाता है, अथवा उसे नियत समय सीमा के भीतर सेवा उपलब्‍ध नहीं करायी जाती है, आवेदन अस्‍वीकृत होने के दिनांक से अथवा नियत समय सीमा के अवसान के तीस दिन के भीतर प्रथम अपील अधिकारी को अपील कर सकेगा:

परन्‍तु प्रथम अपील अधिकारी तीस दिनों की अवधि के अवसान के पश्‍चात भी अपील ग्रहण कर सकेगा, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि अपीलार्थी समय के भीतर अपील प्रस्‍तुत करने में पर्याप्‍त कारणों से प्रविरत किया गया था।

(2)

 

प्रथम अपील अधिकारी पदाभिहित अधिकारी को आदेश में विनिर्दिष्‍ट अवधि के भीतर सेवा उपलब्‍ध कराने का आदेश दे सकेगा या अपील को अस्‍वीकार कर सकेगा।

(3)

 

प्रथम अपील अधिकारी के विनिश्‍चय के विरुद्ध द्वितीय अपील, द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी को ऐसे विनिश्‍चय के दिनांक से 60 दिनों के भीतर की जा सकेगी;

परन्‍तु द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी, 60 दिनों की अवधि के अवसान के पश्‍चात भी अपील ग्रहण कर सकेगा यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि अपीलार्थी समय के भीतर अपील प्रस्‍तुत करने में पर्याप्‍त कारणों से प्रविरत किया गया था।

 

4-

(क)

द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी पदाभिहित अधिकारी को वसी अवधि के भीतर सेवा प्रदान करने का आदेश दे सकेगा, जैसा कि वह विनिर्दिष्‍ट करे या अपील को अस्‍वीकार कर सकेगा।

(ख)

द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी सेवा उपलब्‍ध कराने के आदेश के साथ धारा 7 के उपबंधों के अनुसार शास्‍ति अधिरोपित कर सकेगा।

 

5-

(क)

यथास्‍थिति यदि पदाभिहित अधिकारी अथवा प्राधिकृत अधिकारी धारा 5 की उपधारा (1) के अधीन आवेदन की अभिस्‍वीकृति नहीं देता है, तो आवेदक प्रथम अपील अधिकारी को सीधे आवेदन प्रस्‍तुत कर सकेगा। इस आवेदन का विनिश्‍चय प्रथम अपील की रीति से किया जायेगा।

 

(ख)

यदि पदाभिहित अधिकारी उपधारा (2) के अधीन सेवा प्रदान करने के आदेश का अनुपालन नहीं करता है तो आवेदक द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी को सीधे आवेदन प्रस्‍तुत कर सकेगा। इस आवेदन का विनिश्‍चय प्रथम अपील की रीति से किया जायेगा।

 

6-

प्रथम अपील अधिकारी तथा द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी को, इस धारा के अधीन अपील का विनिश्‍चय करते समय निम्‍नलिखित मामलों के सम्‍बन्‍ध में वही शक्‍तियां होंगी, जो कि किसी वाद का विचारण करते समय सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (अधिनियम संख्‍या 5 सन् 1908) के अधीन सिविल न्‍यायालय में निहित होती है, अर्थात्-

 

(क)

दस्‍तावेजों का प्रकटीकरण तथा निरीक्षण किए जाने की अपेक्षा करना;

 

(ख)

पदाभिहित अधिकारी तथा अपीलार्थी को सुनवाई के लिए समन जारी करना, और

 

(ग)

कोई अन्‍य मामला जो विहित किया जाय।

शास्‍ति

7-

(1)

(क)

जहां द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी की यह राय है कि पदाभिहित अधिकारी बिना पर्याप्‍त तथा युक्‍तियुक्‍त कारण से सेवा प्रदान करने में विफल रहा हो, तो वह एकमुश्‍त शास्‍ति अधिरोपित कर सकता है, जो अन्‍यून 500 रुपये तथा 5000 रुपये से अनधिक होगी।

 

(ख)

जहां द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी की यह राय है कि पदाभिहित अधिकारी ने सेवा प्रदान करने में विलम्‍ब किया है तो वह पदाभिहित अधिकारी पर ऐसे विलम्‍ब के लिए 250 रुपये प्रतिदिन की दर से शास्‍ति अधिरोपित कर सकेगा, जो 5000 रुपये से अनधिक होगी:

परन्‍तु पदाभिहित अधिकारी को, उस पर शास्‍ति अधिरोपित किये जाने के पूर्व सुनवाई का युक्‍तियुक्‍त अवसर प्रदान किया जायेगा।

 

(2)

जहां द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी की यह राय है कि प्रथम अपील अधिकारी बिना किसी पर्याप्‍त तथा युक्‍तियुक्‍त कारण से नियत समय के भीतर अपील का विनिश्‍चय करने में विफल रहा है तो वह प्रथम अपील अधिकारी पर वसी शास्‍ति अधिरोपित कर सकता है जो 500 रुपये से अन्‍यून तथा 5000 रुपये से अनधिक होगी:

परन्‍तु प्रथम अपील अधिकारी को उस पर शास्‍ति अधिरोपित किये जाने से पूर्व सुनवाई का युक्‍तियुक्‍त अवसर दिया जायेगा।

 

(3)

द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी यथास्‍थिति उपधारा (1) या (2) या दोनों के अधीन अधिरोपित शास्‍ति में से प्रतिकर के रूप में वसी धनराशि जो अधिरोपित शास्‍ति से अधिक नहीं होगी, अपीलार्थी को प्रदान करने का आदेश दे सकता है।

 

(4)

द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी का यदि समाधान हो जाता है कि पदाभिहित अधिकारी या प्रथम अपील अधिकारी बिना पर्याप्‍त तथा युक्‍तियुक्‍त कारण से इस अध्‍यादेश के अधीन सौंपे गये कर्तव्‍यों का पालन करने में विफल रहा है तो वह उस पर लागू सेवा नियमों के अधीन अनुशासनात्‍मक कार्रवाई की संस्‍तुति कर सकता है।

पुनरीक्षण

8-

इस अध्‍यादेश के अधीन शास्‍ति अधिरोपित किये जाने के सम्‍बन्‍ध में द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी के किसी आदेश से व्‍यथित पदाभिहित अधिकारी अथवा प्रथम अपील अधिकारी उस आदेश के दिनांक से 60 दिन की अवधि के भीतर पुनरीक्षण करने के लिए राज्‍य सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा नाम निर्दिष्‍ट ऐसे अधिकारी को आवेदन कर सकेगा, जो यथाविहित रीति के अनुसार उस आवेदन पत्र का निस्‍तारण करेगा:

परन्‍तु राज्‍य सरकार द्वारा नाम निर्दिष्‍ट अधिकारी का यह समाधान हो जाने पर कि उक्‍त आवेदन पर्याप्‍त कारण से समय पर प्रस्‍तुत नहीं किया जा सका था, तो वह ऐसे आवेदन को 60 दिन की उक्‍त अवधि की समाप्‍ति के पश्‍चात् भी ग्रहण कर सकेगा।

सद्भावपूर्वक की गयी कार्रवाई का संरक्षण

9-

इस अध्‍यादेश या उसके अधीन बनाये गये किसी नियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गयी या किये जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए किसी व्‍यक्‍ति के विरुद्ध कोई वाद अभियोजन या अन्‍य विधिक कार्यवाही नहीं होगी।

नियम बनाने की शक्‍ति

10-

राज्‍य सरकार गजट में अधिसूचना द्वारा इस अध्‍यादेश के उपबन्‍धों को कार्यान्‍वित करने हेतु नियम बना सकेगी।

कठिनाइयां दूर करने की शक्‍ति

11-

(1)

यदि इस अध्‍यादेश के उपबन्‍धों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्‍पन्‍न होती है तो, राज्‍य सरकार गजट में प्रकाशित आदेश जो इस अध्‍यादेश के उपबन्‍धों से असंगत न हो, द्वारा ऐसे उपबन्‍ध कर सकती है जो कठिनाई दूर करने के लिए उसे आवश्‍यक या समीचीन प्रतीत हो

परन्‍तु ऐसा कोई आदेश इस अध्‍यादेश के प्रारम्‍भ होने से दो वर्ष की समाप्‍ति के पश्‍चात नहीं किया जायेगा।

(2)

उपधारा (1) के अधीन किसी आदेश द्वारा किये गये उपबन्‍ध उसी रूप में प्रभावी होंगे मानो इस अध्‍यादेश में अधिनियमित किये गये हों और वसा कोई आदेश किया जा सकता है, जो इस अध्‍यादेश के प्रारम्‍भ होने के दिनांक से पूर्ववर्ती किसी दिनाक से भूतलक्षी न हो।

(3)

उपधारा (1) के अधीन किये गये प्रत्‍येक आदेश को उसके किये जाने के यथाशक्‍य शीघ्र पश्‍चात् राज्‍य विधान मण्‍डल के दोनों सदनों के समक्ष रखा जायेगा और उत्‍तर प्रदेश साधारण खण्‍ड अधिनियम, 1904 की धारा 23-क की उपधारा (1) के उपबन्‍ध उसी रूप में लागू होंगे जैसा कि वे किसी उत्‍तर प्रदेश अधिनियम के अधीन राज्‍य सरकार द्वारा बनाये गये नियमों के सम्‍बन्‍ध में लागू होते हैं।

बी. एल. जोशी,

राज्‍यपाल,

उत्‍तर प्रदेश।